सैन्य सुरक्षा

ब्रम्होस, भारत, चीन और पाकिस्तान।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफलतापूर्वक पहली बार  सुखोई -30 एमकेआई लड़ाकू विमान से परीक्षण किया गया। बंगाल की खाड़ी में इसका सफल परीक्षण किया गया। ब्रम्होस एयर दोनों पाकिस्तान और चीन के लिए बहुत बड़ा झटका है। इस सफलता पर भारत के आम नागरिक को इसकी सामारिक महत्ता का पता नहीं है जिसको विस्तार मे बताना जरूरी है।

ढोक़लाम पर भारत की चीन की आँख दिखाई सबको याद है। ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाली ब्रम्होस का ही खौफ़ था चिनियो में जिसने चीनी नेतृत्व का पसीना निकाला हुआ था। लड़ाई शुरू होने के 500 सेकंड के अंदर ही चीनी सेना के सारे सामारिक अड्डे जैसे मिसाइल बेस, तेल डिपो, शस्त्र भंडार, फाइटर एयरपोर्ट इत्यादि जो ब्रम्होस की जद मे आते है ध्वस्त कर दिए जाते जिससे चीनी सेना की लड़ाई लड़ने की क्षमता न के बराबर रह जाती। भारतीय मीडिया में लिखा गया कि भारत से व्यापार के कारन चीन ने शुरुआत नहीं की परंतु यदि आप किसी डिफेन्स एक्सपर्ट से पूछेंगे तो वो ब्रम्होस की तरफ ऊँगली करेगा।

पहले भारत के पास सिर्फ ज़मीन से ज़मीन पर मार करने वाली ब्रम्होस थी चीनी बॉर्डर पर, पर अब हवा से मार करने वाली ब्रम्होस  ने सारे समीकरण बदल दिए है।  समुद्र में भारत को सामारिक लाभ होगा। सुखोई पर तैनात ब्रम्होस चीनी समुद्री युद्धपोतों को चींटी की तरह मसल देगी। 400 KM दूर  सुखोई से दागी ब्रह्मोस चीनी समुंद्री जहाजों पर कहर बन के टूट पड़ेगी। सुखोई चीनी मिसाइल डिफेन्स से दूर रहकर अपना काम कर जाएगा। समुद्री चीनी बैटल ग्रुप के लिए 50 से 60 दागी गई ब्रम्होस मौत बन के तांडव करेगी।

वियतनाम को ब्रम्होस की बिक्री की खबर भी चीन के लिए सुखद नहीं है। वियतनाम भी सुखोई विमान उड़ाता है , वह भी एयर ब्रम्होस लेने का मन रखता है। भारत अगर वियतनाम को ब्रम्होस देता है तो वह चीनी  स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल्स पर भारात का प्रहार होगा। साउथ चाइना सी मे चीनी दादागिरी दूर की कौड़ी बन जायेगी।

दूसरी और पाकिस्तान अब ब्रम्होस एक्सटेंडेड रेंज की जद में पहले ही आ चुका है। पाकिस्तान के सारे हवाई अड्डे, नुक्लेअर अड्डे पहले ही ब्रम्होस की जद में है। लड़ाई शुरू होने के 500 सेकंड के अंदर ही सारे ठिकाने सैंकड़ो की तादात मे दागी गई ब्रम्होस तबाह कर देगी जिससे पाकिस्तान घुटनों पर आ जाएगा।

रक्षा अधिकारी ब्रम्होस का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं जो कि छोटे, तेज़ और लंबी मारक क्षमता के होंगे। इसमें ब्रह्मोस II, एक हाइपरसोनिक वर्जन (मच 7 या अधिक) शामिल है, जो युद्धपोत को निशाना बनाने के बाद अपने लांचर पर लौट आएगा। और जिसकी 2020 के आसपास तैयार होने की उम्मीद है।

फिर ब्रह्मोस एनजी या लाइट, जो कि केवल 1.4 टन (और एक 120 किलोमीटर की निचली सीमा) स्वदेशी तौर पर निर्मित तेजस विमान पर लगाया जा सकेगा। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और प्रबंध निदेशक सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा, “यह विचार बड़े पैमाने पर मिसाइल का उत्पादन करता है ताकि हम विभिन्न प्लेटफार्मों पर इसे एकीकृत कर सकें। यह एक नया व्यापार पहल है और हम इसके लिए भारत और विदेश में एक बड़ा बाजार देखते हैं। “

ब्रम्होस को रोकने का कोई विकल्प मौजूद नहीं है और आने वाले 1 दशक तक कोई तोड़ नहीं आ सकता। अगर कोई देश तोड़ निकाल भी लेगा तो तब तक भारत ब्रम्होस 2 (mach 7+) सेना मे शामिल कर चुका होगा जिसका तोड़ 50 वर्ष तक भी नहीं आएगा। कुल मिला कर ब्रम्होस दुश्मन के लिए ऐसा नाम है जो उनको चैन की नींद कभी नहीं सोने देगा और दुश्मन को हमेशा प्रेरित करेगा की भारत की तरफ आँख उठाके नहीं देखे।

ब्रम्होस एक ऐसा शस्त्र है जो विश्व खासकर एशिया मे भारत का वर्चस्व कायम रखेगा।
भारत, भारत की सेना के हाथों में सुरक्षित है।

वंदे मातरम
जय श्री राम


संदीप सैनी

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