अर्थव्यवस्था

भारतनेट परियोजना क्या है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को पूरा करने में वो कैसे अहम भूमिका निभा रही है?

 

 

भारतनेट परियोजना का मार्च 2019 तक सभी पंचायतों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड प्रदान करने का जनादेश है।

भारतनेट परियोजना के अंतर्गत, मोदी सरकार का लक्ष्य है कि 10 लाख किलोमीटर के अतिरिक्त ऑप्टिकल फाइबर के जरिये 1.5 लाख पंचायतों को जोड़ना और ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड और वाईफाई सेवाओं के लिए लगभग 75 प्रतिशत सस्ती कीमत पर दूरसंचार कम्पनीयों को बैंडविड्थ देना।

भारतनेट परियोजना की कुल लागत 45,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से 11,200 करोड़ रुपये पहले चरण के लिए उपयोग किए गए हैं।

यह बहुत बड़ी परियोजना है जिसके लिए सारे उत्पाद भारत में ही बनाये गये है।

अब भारतनेट परियोजना का दूसरा चरण चल रहा है। दूसरे चरण के तहत, सरकार 1.5 लाख ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क रखेगी। भारतनेट का पहला चरण वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में, सरकार ने बहुत से लोगों को बैंकिंग सेवा प्रदान करवाई।अब भारतनेट के माध्यम से  सरकार उन लोगों तक पहुंच जायेगी जो पहले उसकी पहुंच के दायरे से बहार थे।

मोदी सरकार उम्मीद कर रही है की मार्च 2019 तक पूरी भारतनेट परियोजना यानि की उसके दोनों चरणों को 42,000 करोड़ रुपये की लागत के साथ पूरा कर दे ।

दूरसंचार सचिव अरुण सुंदरराजन के मुताबिक भारतनेट चरण 2 को पूरा करने पर राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 4.5 लाख करोड़ रुपये का मूल्य जोड़ा जा सकता है क्योंकि एक अध्ययन के अनुसार भारत में हर 10 फीसदी इंटरनेट उपयोग जीडीपी को 3.3 प्रतिशत बड़ाता है।

बीएसएनएल आठ राज्यों में असम, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जम्मू और कश्मीर और सिक्किम में ऑप्टिकल फाइबर का उत्पादन करेगी जो भारतनेट के पहले चरण के तहत शामिल नहीं किए गए थे। पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को तीन राज्यों – हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और ओडिशा के लिए अनुबंध प्रदान किया गया है।

सरकार का अनुमान है कि भारतनेट का दूसरा चरण देश में मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर पदचिह्न को दोगुना करेगा और इस परियोजना के चरणबद्ध दौरान 10 करोड़ को रोजगार प्रदान करेगा।

“भारत में वर्तमान में 38,000 वाईफाई हॉटस्पॉट हैं I भारतनेट चरण 2 के तहत, लगभग 6-7 लाख वाईफाई हॉटस्पॉट जोड़े जाएंगे जिसमे से प्रत्येक पंचायत में 2-5 हॉटस्पॉट होंगे। कुछ वाईफाई हॉटस्पॉट्स शुरू में वाणिज्यिक रूप से व्यवहार्य नहीं हो सकते हैं। दूरसंचार सचिव अरुण सुंदरराजन ने कहा है कि हम (दूरसंचार) ऑपरेटरों के लिए करीब 3,600 करोड़ रुपए की व्यवहार्यता अंतर कोष प्रदान करेंगे।

भारतनेट चरण 1 के तहत, सरकार ने 15,000 वाईफाई हॉटस्पॉट स्थापित किए हैं जिनमें से लगभग 11,000 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं और बाकी के अर्ध-ग्रामीण शेत्रों में है।

48,000 से अधिक गांवों में ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू हो चुकी हैं और 75,000 से अधिक गांव सेवाओं के लिए तैयार हैं

दूरसंचार मंत्रालय ने सात राज्यों – महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और झारखंड से अनुबंध किया है, जो केंद्र सरकार से आंशिक वित्त पोषण के जरिए इस परियोजना को अपनी ओर से पूरा करेंगी  ।

दूरसंचार ऑपरेटरों रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, आइडिया सेल्युलर और वोडाफोन भारतनेट के तहत सेवाएं प्रदान करने में रुचि रखते हैं।

रिलायंस जियो ने सबसे ज्यादा भुगतान किया।रिलायंस जियो ने 30,000 ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए 13 करोड़ रूपए की सबसे अधिक अग्रिम सदस्यता शुल्क अदा किया, जिसमें सरकार द्वारा हर पंचायत में बैंडविड्थ खरीदने की प्रतिबद्धता थी क्योंकि यह परियोजना का विस्तार करती है।

भारती एयरटेल ने 30,500 ग्राम पंचायतों को कवर करने के लिए बैंडविड्थ खरीदने के लिए 5 करोड़ रुपये,वोडाफोन ने 11 लाख और आइडिया सेल्यूलर ने 5 लाख रुपये का भुगतान किया।

भारत नेट और डिजिटल इंडिया द्वारा सरकार  लोगों को जोड़ने,ज्ञान बड़ाने,नोकरियां प्रदान करने और उनकी ज़िन्दगी को छूने का प्रयास कर रहे है और सर्वप्रथम डिजिटल डिवाइड को ख़तम करके वित्तीय समावेशन को बड़ा रहे है।  

 

 


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