संस्कृति

ख्वाजा मॊईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर माथा टेकनेवाले हिन्दुओं मत भूलॊ की उसने पृथ्वीराज चौहान की पत्नी के साथ क्या किया था।

अजमेर की दरगाह जो की सूफी संत ख्वाजा मॊईनुद्दीन चिश्ती का मक्बरा है कभी हिन्दू मंदिर हुआ करता था। मुघलॊं ने जैसे देश के हर मंदिर को तोड़ वहाँ पर मस्जिद और मक्बरें बनवाई उसी तरह अजमेर का दरगाह भी उन्हीं मुघलॊं की बर्बरता की निशानी है। मॊईनुद्दीन चिश्ती कॊई चमत्कारी बाबा या सूफी संत नहीं था। अपितु वह तो निहायती घटिया और पाखंडी आदमी था। उसका भारत आने का उद्देश्य इस्लाम को भारत में  फैलाना था।

मॊईनुद्दीन चिश्ती ने ही घॊरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रण दिया था। चिश्ती कॊई चमत्कारी बाबा नहीं वो तो गाय का माँस खानेवाला और बर्बर व्यक्तित्व वाला व्यक्ति था। ख्वाजा के इर्द गिर्द घूमनेवाली सारी कहानीयाँ हिन्दुओं को भ्रमित करने के लिये और भारत में अपने अस्तित्व को स्थापित करने के लिए ही चिश्ती और उसके चेलॊं द्वारा रची गयी हैं।

दुर्भाग्य यह है की स्वतंत्रता के बाद भी हम पर मुघलॊं की संतान नेहरू ने हुकूमत चलाई। इसीलिये मतांध और बलात्कारी घॊरी महान बना और पाखंडी चिश्ती संत। किन्तु उस कायर, कुरूपी बर्बर घॊरी को १६ बार हरानेवाला भारत का आखरी हिन्दू राजा पृथ्विराज चौहान हिन्दुओं की  स्मृति से मिट ही गया। आज हिन्दू उस चिश्ती के दरगाह पर माथा टेकते है जिस चिश्ती ने इस्लाम न अपनाने पर पृथ्विराज चौहान की पत्नी संयॊगिता का बलात्कार करने के लिय घॊरी को उकसाया। ऐसे  बर्बर और निर्मम व्यक्ति को संत कहते हैं और वहाँ माथा टेकने जाते हैं हिन्दू। लज्जा नहीं आती?

पृथ्विराज चौहान ने घोरी को युद्ध में १६ बार हराया था किन्तु हर बार उसे स्वतंत्रता दे दी। लेकिन पृथ्विराज एक बार क्या हार गया घॊरी ने पृथ्विराज की आँखे निकालदी और उसके धड़ को सिर से अलग कर दिया। हिन्दुओं का नरसंहार करने वाले घॊरी, खिल्जी और टिप्पू जैसे मतांध की जयंति मनाते हैं हिन्दू कैसी विडंबना है? इन बर्बर लोगों के ऊपर चलनचित्र बनाते हैं फिल्मिस्तान के आतंकी निर्देशक। पाठ्शाला की किताबों में उनको महान नायक के रूप में चित्रित करती हैं हमारी सरकारें।

भारत के हर मस्जिद और मकबरे के नीचे हिन्दुओं का मंदिर है जो मुघलॊं की बर्बरता की कहानी सुनाने को व्याकुल है। लेकिन हिन्दुओं के कान और आँख दॊनॊं बंद है। अगर खुले होते तो अजमेर में ख्वाजा के दरबार में माथा टेकने से पहले एक बार पृथ्विराज चौहान और उसकी पत्नी के बारे में अवश्य सोचते। ये वो ख्वाजा है जिसने ७ लाख हिन्दुओं को बलपूर्वक मुसल्मान बनाया। जिसने तीसरी बार एक हिन्दू लड़की से जबरन शादी करके उसे इस्लाम में धर्मांतरण करवाया। यह वही ख्वाजा है जो पृथ्वीराज के मृत्यु के पश्चात गाना गाते हुए कहता है कि हमने बड़ी मुश्किलों से हिन्दुस्तान पर कब्ज़ा किया है। ‘जिहादी बलात्कार’ करके हमने पृथ्वीराज को धॊखे से हराया है। हिन्दू अब नाज़ुक और अकेले पड़ गयें है। और चौहान की अप्रतिम सुंदर पत्नी अब घॊरी की हराम में सॊया करेगी।

लज्जा आनी चाहिए हिन्दुओं को जो चिश्ती के दरगाह पर जाकर माथा ठेकते हैं। अपनी पत्नी का बलात्कार होते हुए देख भी पृथ्वीराज ने इस्लाम नहीं अपनाया। अपनी आँखे निकाल दिए जाने के बाद भी उसने धर्म परिवरतन नहीं किया। बलपूर्वक गाय का मांस खिलाने के बाद भी उसने घॊरी के सामने हार नहीं मानी। सर कट गया लेकिन धर्म नहीं छोड़ा उस महान पृथ्विराज चौहान ने। अगर प्रणाम करना ही है तो उस महान आत्मा को करॊ जो अपनी अंतिम साँस तक भी मुघलॊं से लड़ती रही।

आज अफ़ग़ानिस्तान में भारत का यह शेर, बलात्कारी मुहम्मद घॊरी के मक्बरे के बाहर सॊया हुआ है। आज भी वहाँ के मुसल्मान पृथ्वीराज की  कब्र के ऊपर अपनी बर्बरता का प्रदर्शन करते हुए उसके ऊपर अपना आवेश दिखातें हैं। लेकिन हिन्दू यहाँ उसके हत्यारे की दरगाह पर साष्टांग दंडवत करते हैं। डूब मरना चाहिए हमें। सर कटे किन्तु चिश्ती के सामने सर ना झुके।

भारत के शेर पृथ्वीराज चौहान को कॊटी कोटी प्रणाम।


Shaanyora

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